कैलाश - एक शक्ति!
“ कैलाश - जहाँ भटके कदम ठहर जाते हैं, और अंधेरों में भी दीप जल जाते हैं। ” - अंशिका चतुर्वेदी Pinterest पृथ्वी-गगन के बीच ठहरता है स्वप्न अनोखा, "धुरी" जहाँ से ब्रह्माण्ड का सारा विस्तार है; समय-स्थान का संगम रुककर देता सन्देश, मन में जैसे मौन शांति का आधार है! रहस्यों से भरा है यह पावन अद्भुत धाम, जहाँ विज्ञान भी हार गया अनेकों बार; हर तर्क यहाँ मौन हो जाता निष्काम, हर उत्तर गिरता, टूटता बार-बार! एक ओर है मानसरोवर- निर्मल, शांत, स्थिर, जिसका स्पर्श आत्मा को पवित्र कर जाए; हथेली पर जैसे थाम लिया कोई चित्र, जहाँ हर लहर जीवन को नया अर्थ दिलाए! दूसरी ओर आधे चाँद-सी गहरी झील, जिसमें अंधकार और खारापन समाया; जीवन के अभाव का नीरव, सुनसान सिलसिला मानो दुःख का सागर वहीं ठहराया! दोनों ही विपरीत रूप- सुख और दुःख के रंग, मानव जीवन का शाश्वत प्रतिबिम्ब बनते हैं; एक रोशन दीप, एक अंधियारे का संग, ये पर्वत के रहस्य युगों से सुनते हैं! वह अडिग शिला, जिसमें शिव का वास है, जिस पर अरबों प्रार्थनाएँ सफल रहीं; किंतु जो चढ़ने चला, वह पीड़ा का दास है, धरती पर लौट आया- थका, और टूटा कहीं! क्या च...