सलाखों के पीछे का दृश्य!
इस प्रांत के वह नागरिक जिनके बारे में हम विचार ही नहीं करते - कैदी! जेल में बैठे वह व्यक्ति जो अपने जीवन का बहुमूल्य समय सलाखों के पीछे बिता रहे हैं। उनका हर एक क्षण कैसे गुज़रता होगा, क्या हम कभी विचार करते हैं? नहीं! क्योंकि हमारे पास इतना समय ही नहीं है, और जब समय होता है तो राष्ट्रहित की ऐसी महत्वपूर्ण बातें हमारे मन में आती ही नहीं। कैदियों का यह विषय गंभीरता से लेने का है। भारत में जेलों की स्थिति इतनी अच्छी तो नहीं है कि हम निश्चित होकर बैठ सकें। iStock Photo पहले हैं, संदिग्ध या विचाराधीन कैदी, जो जांच के दौरान न्यायिक हिरासत में कैद व्यक्ति होते हैं। भारतीय जेलों में ऐसे कई लोग काफ़ी साल से इंतज़ार में कैद होकर बैठे हैं। यदि बात कुछ समय की हो तो ठीक है परंतु इतनी लंबी अवधि में बंधकर रहना और तब यह भी नहीं पता हो कि रिहाई कब होगी, मानसिक यातना का कारण बनता है। दूसरे कैदी वह हैं जो अपनी सज़ा पूरी भी कर चुके हैं, परंतु कड़क कानून न होने व धीमी गति से कानूनी कार्यवाही होने की वजह से आज भी कैद हैं। एक उदाहरण अहमदाबाद की जेल का है जहां एक इंटरव्यू में कैदी ने बताया कि उसकी सज...